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21 अगस्त को पंजाब बंद: कौमी इंसाफ मोर्चा ने कहा- बंदी सिखों की रिहाई और 15 अगस्त की कार्रवाई के विरोध में बंद का आह्वान
जेलों में सजा पूरी करने के बावजूद लंबे समय से बंद सिखों की रिहाई, पैरोल के अधिकार और 15 अगस्त को शांतिपूर्ण विरोध मार्च के दौरान संगत पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में राष्ट्रीय न्याय मोर्चा (कौमी इंसाफ मोर्चा) ने 21 अगस्त को पंजाब बंद का ऐलान किया है। पंजाब प्रेस क्लब जालंधर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोर्चे के संयोजक भाई पाल सिंह फ्रांस समेत पंथक, किसान और दलित संगठनों के नेताओं ने बंद के फैसले की जानकारी दी और सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की।भाई पाल सिंह फ्रांस ने कहा कि चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर 7 जनवरी 2023 से बंदी सिखों की रिहाई के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से मोर्चा चल रहा है। उनका आरोप है कि 32-32 साल की सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों को रिहा नहीं किया जा रहा और उन्हें पैरोल का कानूनी अधिकार भी नहीं मिल रहा। नेताओं ने भाई जगतार सिंह हवारा की 83 वर्षीय बुजुर्ग मां की गंभीर हालत का हवाला देते हुए कहा कि वह अपने बेटे से मिलने और उसे गले लगाने के लिए आखिरी समय में इंतजार कर रही हैं। मोर्चे ने इसे मानवीय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
मोर्चे के नेताओं ने आरोप लगाया कि 15 अगस्त को राजभवन की ओर शांतिपूर्ण विरोध मार्च कर रही संगत पर पुलिस ने अमानवीय कार्रवाई की। उनका दावा है कि बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और संगत पर ड्रोन के जरिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए तथा रासायनिक पानी की बौछारें की गईं। नेताओं के मुताबिक, इस दौरान कई लोगों को आंखों, त्वचा और सांस से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया कि कवरेज कर रहे दो पत्रकार घायल हुए। मोर्चे ने व्यापार मंडलों, ट्रांसपोर्ट यूनियनों, किसान-मजदूर संगठनों, दलित संगठनों, कर्मचारी फेडरेशनों और इंसाफ पसंद नागरिकों से धर्म, जाति और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर बंद को समर्थन देने की अपील की। नेताओं ने 21 अगस्त को दोपहर 2 बजे तक कारोबार और वाहनों को बंद रखकर संघर्ष में सहयोग देने का आग्रह किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिरोमणि अकाली दल के नेता पूनर सुरजीत, गुरप्रताप वडाला सहित अन्य नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पंजाब बंद को सिख तालमेल कमेटी और आगाज एनजीओ ने भी समर्थन दिया है।
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