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Israel: सीरिया में तुर्किये की सैन्य विस्तार योजना पर इस्राइल की चेतावनी, राजदूत बोले- हद पार कर दी गई है
Fri, 21 Aug 2026 07:33 AM IST
Devesh Tripathi
एएनआई, यरुशलम
एएनआई, यरुशलम
Published by: Devesh Tripathi
Updated Fri, 21 Aug 2026 07:33 AM IST
अमेरिका में इस्राइल के राजदूत येचिएल लेइटर ने दावा किया कि इस्राइल को सीरिया में तुर्किये की सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की योजना की जानकारी मिली थी। उनके मुताबिक, इस गतिविधि को पहले से तय समझौतों के विपरीत माना गया और संबंधित पक्षों को चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद कथित कदम आगे बढ़ने पर इस्राइल ने सीरिया में कार्रवाई की।
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अमेरिका में इस्राइली राजदूत येचिएल लेइटर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका में इस्राइल के राजदूत येचिएल लेइटर ने कहा है कि इस्राइल को स्पष्ट खुफिया जानकारी मिली थी कि तुर्किये सीरिया में अपनी सैन्य मौजूदगी का बड़े स्तर पर विस्तार करने की योजना बना रहा है। उन्होंने इसे हद पार करना बताया। 'द यरूशलम पोस्ट' के साथ बातचीत में लेइटर ने कहा, "हम तुर्किये या सीरिया में से किसी के साथ तनाव बढ़ाना या युद्ध नहीं चाहते। लेकिन एक हद पार की गई है।"
उनकी यह टिप्पणी इस्राइल द्वारा सीरिया में किए गए हवाई हमलों के बाद आई है। इन हमलों की सीरिया और तुर्किये दोनों की सरकारों ने आलोचना की थी। लेइटर ने कहा, "यह तुर्किये की ओर से समझौतों का स्पष्ट उल्लंघन माना जा रहा था। जिन लोगों को खुफिया जानकारी दी जानी जरूरी थी, उन्हें वह जानकारी मिल गई। जिन्हें पता होना चाहिए था कि क्या होने वाला है, उन्हें इसकी जानकारी थी। हमने स्पष्ट कर दिया था कि यह हमारे समझौतों का उल्लंघन है और इसी वजह से इस्राइल ने कार्रवाई की।"
तुर्किये पर इस्राइल ने लगाए क्या आरोप?
लेइटर के मुताबिक, मंगलवार को अलेप्पो के पास सीरिया में अबू अल-दुहूर एयरबेस पर इस्राइल ने जो हमला किया, वह कथित तुर्किये के कदम को लेकर दी गई चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिए जाने के बाद किया गया। सीरियाई अधिकारियों ने कहा था कि एयरफील्ड पर कम से कम आठ हमले हुए। बाद में सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई।
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इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को कहा था, "इस्राइल ने संदेश स्पष्ट कर दिया है: ऐसा मत करो।" लेइटर ने कहा कि तुर्की का कथित कदम अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के दौरान इस्राइल और सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के प्रशासन के बीच बनी समझ के खिलाफ था। इस समझ के तहत सीरिया में मौजूदा स्थिति को "स्थिर" रखा गया था।
क्या सीरियाई इलाके पर कब्जा कर रहा तुर्किये?
उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में पेरिस में हुई एक बैठक के दौरान भी इन समझों की पुष्टि की गई थी। बैठक में सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी, अमेरिका के सीरिया मामलों के दूत टॉम बैरक, लेइटर, तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद प्रमुख गिल रीच और नेतन्याहू के सैन्य सचिव रोमन गोफमैन शामिल हुए थे। गोफमैन अब मोसाद के निदेशक हैं।
लेइटर ने कहा, "इस रोक का मतलब है कि जिस तरह तुर्क आगे नहीं बढ़ते, उसी तरह हम भी आगे नहीं बढ़ते और वे हमें पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं करते।" उन्होंने कहा कि इस्राइल सीरिया में सुरक्षा क्षेत्र के तहत केवल 78 वर्ग मील क्षेत्र में मौजूद है, जबकि तुर्की ने पिछले कई वर्षों में उत्तरी सीरिया में 3,500 वर्ग मील क्षेत्र पर धीरे-धीरे कब्जा बढ़ाया है। यह सीरिया के करीब पांच प्रतिशत क्षेत्र के बराबर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यों नहीं की हमले की निंदा?
लेइटर ने कहा कि अमेरिका के सीरिया मामलों के दूत और तुर्किये में अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक को छोड़कर वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने सीरिया में इस्राइली हमले की निंदा नहीं की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन की नीति पहले तय की गई स्थिति को बनाए रखने की है और इसी वजह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हमले की निंदा नहीं की।
तनाव के बावजूद लेइटर ने कहा कि इस्राइल का मानना है कि सीरिया टकराव नहीं चाहता। उन्होंने कहा, "यह हमारे लिए स्पष्ट है कि सीरियाई हमारे साथ टकराव नहीं चाहते।" लेइटर ने कहा, "इसीलिए हम तुर्कों से कह रहे हैं कि वे संघर्ष पैदा न करें। इस बात के एक से अधिक संकेत हैं कि तुर्किये की नियोजित कार्रवाई सीरियाई लोगों पर थोपी गई थी।"
तुर्किये और सीरिया के बयानों में क्यों अंतर?
उन्होंने हमले के बाद तुर्किये और सीरिया के बयानों में अंतर की ओर भी इशारा किया। लेइटर ने कहा कि सीरिया के विदेश मंत्री शैबानी ने हमले से कुछ दिन पहले तुर्किये के एक प्रतिनिधिमंडल के सीरिया आने की बात स्वीकार की थी, जबकि तुर्किये ने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा, "उन्हें आपस में इसे सुलझाना चाहिए।"
इस्राइली राजदूत ने कहा कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर इस्राइल सीरिया के साथ सीधे बातचीत फिर शुरू करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "बातचीत फिर शुरू की जा सकती है। हम सीरियाई लोगों के साथ पहले हुई आमने-सामने की बातचीत जारी रखना चाहते हैं।"
क्या तुर्किये के साथ सुधरेंगे इस्राइल के संबंध?
तुर्किये के साथ संबंधों को लेकर लेइटर ने कहा कि इस्राइल अंकारा के साथ भी बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने इस्राइल के खिलाफ तुर्किये नेताओं के बयानों की आलोचना की। उन्होंने कहा, "हम निश्चित रूप से उनके साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन देश के वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों से लगता है कि वे इस्राइल को दुनिया के नक्शे से मिटा देना पसंद करेंगे।"
लेइटर तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की इस्राइल के खिलाफ बार-बार की गई टिप्पणियों और तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान के उस बयान का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि "इस्राइल मानवता पर एक दाग है।" लेइटर ने कहा, "ऐसे समय में जब तुर्किये हमास के नेताओं की मेजबानी कर रहा है। हिजबुल्ला और हमास को धन दे रहा है, जो इस्राइल के खिलाफ ईरान की शाखा हैं, ऐसे में उसके लिए लेबनान और सीरिया में अपना प्रभाव बढ़ाना उचित नहीं है।"
उन्होंने कहा, "मौजूदा परिस्थितियों में तुर्किये ऐसा पक्ष नहीं हो सकता जो क्षेत्र में शांति कायम करने में मदद करे।" लेइटर ने कहा, "काश हम यरुशलम और अंकारा के बीच कई दशक पहले जैसे संबंधों की स्थिति में लौट पाते। तब हम क्षेत्र में तुर्किये के प्रभाव के लिए खुले होते। लेकिन जब तुर्किये आतंकवादी संगठनों को धन दे रहा है, तब क्षेत्र में उसके प्रभाव का बढ़ना तार्किक नहीं है।"
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उनकी यह टिप्पणी इस्राइल द्वारा सीरिया में किए गए हवाई हमलों के बाद आई है। इन हमलों की सीरिया और तुर्किये दोनों की सरकारों ने आलोचना की थी। लेइटर ने कहा, "यह तुर्किये की ओर से समझौतों का स्पष्ट उल्लंघन माना जा रहा था। जिन लोगों को खुफिया जानकारी दी जानी जरूरी थी, उन्हें वह जानकारी मिल गई। जिन्हें पता होना चाहिए था कि क्या होने वाला है, उन्हें इसकी जानकारी थी। हमने स्पष्ट कर दिया था कि यह हमारे समझौतों का उल्लंघन है और इसी वजह से इस्राइल ने कार्रवाई की।"
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तुर्किये पर इस्राइल ने लगाए क्या आरोप?
लेइटर के मुताबिक, मंगलवार को अलेप्पो के पास सीरिया में अबू अल-दुहूर एयरबेस पर इस्राइल ने जो हमला किया, वह कथित तुर्किये के कदम को लेकर दी गई चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिए जाने के बाद किया गया। सीरियाई अधिकारियों ने कहा था कि एयरफील्ड पर कम से कम आठ हमले हुए। बाद में सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई।
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इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को कहा था, "इस्राइल ने संदेश स्पष्ट कर दिया है: ऐसा मत करो।" लेइटर ने कहा कि तुर्की का कथित कदम अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के दौरान इस्राइल और सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के प्रशासन के बीच बनी समझ के खिलाफ था। इस समझ के तहत सीरिया में मौजूदा स्थिति को "स्थिर" रखा गया था।
क्या सीरियाई इलाके पर कब्जा कर रहा तुर्किये?
उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में पेरिस में हुई एक बैठक के दौरान भी इन समझों की पुष्टि की गई थी। बैठक में सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी, अमेरिका के सीरिया मामलों के दूत टॉम बैरक, लेइटर, तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद प्रमुख गिल रीच और नेतन्याहू के सैन्य सचिव रोमन गोफमैन शामिल हुए थे। गोफमैन अब मोसाद के निदेशक हैं।
लेइटर ने कहा, "इस रोक का मतलब है कि जिस तरह तुर्क आगे नहीं बढ़ते, उसी तरह हम भी आगे नहीं बढ़ते और वे हमें पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं करते।" उन्होंने कहा कि इस्राइल सीरिया में सुरक्षा क्षेत्र के तहत केवल 78 वर्ग मील क्षेत्र में मौजूद है, जबकि तुर्की ने पिछले कई वर्षों में उत्तरी सीरिया में 3,500 वर्ग मील क्षेत्र पर धीरे-धीरे कब्जा बढ़ाया है। यह सीरिया के करीब पांच प्रतिशत क्षेत्र के बराबर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यों नहीं की हमले की निंदा?
लेइटर ने कहा कि अमेरिका के सीरिया मामलों के दूत और तुर्किये में अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक को छोड़कर वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने सीरिया में इस्राइली हमले की निंदा नहीं की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन की नीति पहले तय की गई स्थिति को बनाए रखने की है और इसी वजह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हमले की निंदा नहीं की।
तनाव के बावजूद लेइटर ने कहा कि इस्राइल का मानना है कि सीरिया टकराव नहीं चाहता। उन्होंने कहा, "यह हमारे लिए स्पष्ट है कि सीरियाई हमारे साथ टकराव नहीं चाहते।" लेइटर ने कहा, "इसीलिए हम तुर्कों से कह रहे हैं कि वे संघर्ष पैदा न करें। इस बात के एक से अधिक संकेत हैं कि तुर्किये की नियोजित कार्रवाई सीरियाई लोगों पर थोपी गई थी।"
तुर्किये और सीरिया के बयानों में क्यों अंतर?
उन्होंने हमले के बाद तुर्किये और सीरिया के बयानों में अंतर की ओर भी इशारा किया। लेइटर ने कहा कि सीरिया के विदेश मंत्री शैबानी ने हमले से कुछ दिन पहले तुर्किये के एक प्रतिनिधिमंडल के सीरिया आने की बात स्वीकार की थी, जबकि तुर्किये ने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा, "उन्हें आपस में इसे सुलझाना चाहिए।"
इस्राइली राजदूत ने कहा कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर इस्राइल सीरिया के साथ सीधे बातचीत फिर शुरू करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "बातचीत फिर शुरू की जा सकती है। हम सीरियाई लोगों के साथ पहले हुई आमने-सामने की बातचीत जारी रखना चाहते हैं।"
क्या तुर्किये के साथ सुधरेंगे इस्राइल के संबंध?
तुर्किये के साथ संबंधों को लेकर लेइटर ने कहा कि इस्राइल अंकारा के साथ भी बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने इस्राइल के खिलाफ तुर्किये नेताओं के बयानों की आलोचना की। उन्होंने कहा, "हम निश्चित रूप से उनके साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन देश के वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों से लगता है कि वे इस्राइल को दुनिया के नक्शे से मिटा देना पसंद करेंगे।"
लेइटर तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की इस्राइल के खिलाफ बार-बार की गई टिप्पणियों और तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान के उस बयान का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि "इस्राइल मानवता पर एक दाग है।" लेइटर ने कहा, "ऐसे समय में जब तुर्किये हमास के नेताओं की मेजबानी कर रहा है। हिजबुल्ला और हमास को धन दे रहा है, जो इस्राइल के खिलाफ ईरान की शाखा हैं, ऐसे में उसके लिए लेबनान और सीरिया में अपना प्रभाव बढ़ाना उचित नहीं है।"
उन्होंने कहा, "मौजूदा परिस्थितियों में तुर्किये ऐसा पक्ष नहीं हो सकता जो क्षेत्र में शांति कायम करने में मदद करे।" लेइटर ने कहा, "काश हम यरुशलम और अंकारा के बीच कई दशक पहले जैसे संबंधों की स्थिति में लौट पाते। तब हम क्षेत्र में तुर्किये के प्रभाव के लिए खुले होते। लेकिन जब तुर्किये आतंकवादी संगठनों को धन दे रहा है, तब क्षेत्र में उसके प्रभाव का बढ़ना तार्किक नहीं है।"