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Solan News: सोलन में 10 सितंबर को राष्ट्रीय मशरूम मेले का आयोजन, 1,500 किसान होंगे शामिल
Fri, 21 Aug 2026 12:43 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Fri, 21 Aug 2026 12:43 AM IST
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200 से एक लाख रुपये तक प्रतिकिलो बिकने वाली मशरूम की लगेगी प्रदर्शनी
10 सितंबर को लगेगा राष्ट्रीय मशरूम मेला, देशभर के 1500 ग्रोवर होंगे शामिल
डीएमआर ने अभी तक 20 से ज्यादा नई खाने और औषधीय मशरूम की है तैयार
लकड़ी के बुरादे से लेकर मसालों के अवशेषों तक मशरूम उगाने का दिखेगा सफर
ललित कश्यप
सोलन। देश के खुंब अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) में आगामी 10 सितंबर को राष्ट्रीय मशरूम मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में देशभर से लगभग 1,500 मशरूम उत्पादक और किसान शिरकत करेंगे। मेले का मुख्य आकर्षण 20 से अधिक प्रजातियों की मशरूमों की प्रदर्शनी होगी, जिनकी कीमत 200 रुपये से 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक है।
मेले के दौरान लगने वाली प्रदर्शनी में लकड़ी के बुरादे से लेकर मसालों के अपशिष्टों पर मशरूम उगाने की आधुनिक तकनीकें प्रदर्शित की जाएंगी। डीएमआर के वैज्ञानिकों ने औषधीय गुणों से भरपूर टर्की टेल मशरूम को तूनी और अन्य लकड़ियों के बुरादे पर उगाने में सफलता हासिल की है। दो साल के शोध के बाद मिली इस कामयाबी से मशरूम का उत्पादन चार गुना बढ़ गया है। यह मशरूम कैंसर से बचाव और कीमोथेरेपी के कारण होने वाली कमजोरी दूर करने में सहायक है। बाजार में इसकी कीमत करीब 20,000 रुपये प्रति किलो है। खुंब निदेशालय के कार्यकारी निदेशक बृज लाल अत्री ने बताया कि मेले में सभी औषधीय और खाद्य मशरूम प्रदर्शित होंगे। विशेषज्ञों द्वारा किए गए नए शोध और उत्पाद भी प्रदर्शनी में लगेंगे।
मसालों के अवशेषों पर ढिंगरी और वेगनमीट मशरूम
डीएमआर सोलन और राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र अजमेर मिलकर जीरा, सौंफ और धनिया के अपशिष्टों पर ढिंगरी (ऑयस्टर) मशरूम उगाने का शोध कर रहे हैं। इससे पूर्व अदरक और तुलसी के अवशेषों पर सफल परीक्षण किया जा चुका है। बाजार में 100 से 200 रुपये प्रति किलो बिकने वाली ढिंगरी मशरूम में प्रोटीन, फाइबर और विटामिन-डी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। शाकाहारी लोगों के लिए सोलन के वैज्ञानिकों ने वेगनमीट मशरूम का भी सफल शोध किया है। यह स्वाद, रंग और आकार में मटन की तरह होगी और इसमें चिकन-मटन से अधिक प्रोटीन है, जबकि फैट, सोडियम और कोलेस्ट्रॉल बेहद कम है।
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औषधीय मशरूम उत्पादन में युवाओं का रुझान
युवाओं में औषधीय मशरूम उत्पादन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। डीएमआर अब तक 500 से अधिक उत्पादकों को प्रशिक्षण दे चुका है। इनमें सबसे अधिक मांग कॉर्डिसेप्स (कीड़ा-जड़ी) मशरूम की है, जिसकी कीमत बाजार में 1 लाख रुपये प्रति किलो तक है। इसका उपयोग स्टैमिना और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं में होता है। इसके अलावा दिमागी नसों को ताकत देने वाली हेरेशियम, कैंसर रोधी शिटाके और रोग प्रतिरोधक गैनोडर्मा मशरूम का उत्पादन और प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
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10 सितंबर को लगेगा राष्ट्रीय मशरूम मेला, देशभर के 1500 ग्रोवर होंगे शामिल
डीएमआर ने अभी तक 20 से ज्यादा नई खाने और औषधीय मशरूम की है तैयार
लकड़ी के बुरादे से लेकर मसालों के अवशेषों तक मशरूम उगाने का दिखेगा सफर
ललित कश्यप
सोलन। देश के खुंब अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) में आगामी 10 सितंबर को राष्ट्रीय मशरूम मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में देशभर से लगभग 1,500 मशरूम उत्पादक और किसान शिरकत करेंगे। मेले का मुख्य आकर्षण 20 से अधिक प्रजातियों की मशरूमों की प्रदर्शनी होगी, जिनकी कीमत 200 रुपये से 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक है।
मेले के दौरान लगने वाली प्रदर्शनी में लकड़ी के बुरादे से लेकर मसालों के अपशिष्टों पर मशरूम उगाने की आधुनिक तकनीकें प्रदर्शित की जाएंगी। डीएमआर के वैज्ञानिकों ने औषधीय गुणों से भरपूर टर्की टेल मशरूम को तूनी और अन्य लकड़ियों के बुरादे पर उगाने में सफलता हासिल की है। दो साल के शोध के बाद मिली इस कामयाबी से मशरूम का उत्पादन चार गुना बढ़ गया है। यह मशरूम कैंसर से बचाव और कीमोथेरेपी के कारण होने वाली कमजोरी दूर करने में सहायक है। बाजार में इसकी कीमत करीब 20,000 रुपये प्रति किलो है। खुंब निदेशालय के कार्यकारी निदेशक बृज लाल अत्री ने बताया कि मेले में सभी औषधीय और खाद्य मशरूम प्रदर्शित होंगे। विशेषज्ञों द्वारा किए गए नए शोध और उत्पाद भी प्रदर्शनी में लगेंगे।
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मसालों के अवशेषों पर ढिंगरी और वेगनमीट मशरूम
डीएमआर सोलन और राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र अजमेर मिलकर जीरा, सौंफ और धनिया के अपशिष्टों पर ढिंगरी (ऑयस्टर) मशरूम उगाने का शोध कर रहे हैं। इससे पूर्व अदरक और तुलसी के अवशेषों पर सफल परीक्षण किया जा चुका है। बाजार में 100 से 200 रुपये प्रति किलो बिकने वाली ढिंगरी मशरूम में प्रोटीन, फाइबर और विटामिन-डी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। शाकाहारी लोगों के लिए सोलन के वैज्ञानिकों ने वेगनमीट मशरूम का भी सफल शोध किया है। यह स्वाद, रंग और आकार में मटन की तरह होगी और इसमें चिकन-मटन से अधिक प्रोटीन है, जबकि फैट, सोडियम और कोलेस्ट्रॉल बेहद कम है।
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औषधीय मशरूम उत्पादन में युवाओं का रुझान
युवाओं में औषधीय मशरूम उत्पादन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। डीएमआर अब तक 500 से अधिक उत्पादकों को प्रशिक्षण दे चुका है। इनमें सबसे अधिक मांग कॉर्डिसेप्स (कीड़ा-जड़ी) मशरूम की है, जिसकी कीमत बाजार में 1 लाख रुपये प्रति किलो तक है। इसका उपयोग स्टैमिना और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं में होता है। इसके अलावा दिमागी नसों को ताकत देने वाली हेरेशियम, कैंसर रोधी शिटाके और रोग प्रतिरोधक गैनोडर्मा मशरूम का उत्पादन और प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।