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वंदे मातरम पर सियासी घमासान: BJP ने कांग्रेस के फैसले को नकारा, कहा- 1937 के इसी फैसले ने रखी विभाजन की नींव
Sat, 22 Aug 2026 02:40 PM IST
Devesh Tripathi
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 22 Aug 2026 02:40 PM IST
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में वंदे मातरम को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस के उस निर्णय पर सवाल उठाए, जिसमें गीत के दो छंद गाने की बात कही गई है। पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह रुख ऐतिहासिक घटनाओं और तुष्टिकरण की राजनीति से जुड़ा रहा है।
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वंदे मातरम विवाद
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ पहली बार बैठक की। इस बैठक के बाद भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने बताया कि पदाधिकारियों की इस बैठक में पहला प्रस्ताव वंदे मातरम के सम्मान को लेकर पारित किया गया। संबित पात्रा ने इस दौरान कांग्रेस के वंदे मातरम के केवल दो छंद गाने के फैसले को लेकर निशाना साधा।
संबित पात्रा ने कहा कि वंदे मातरम के बीज मंत्र के मूल में देश और देशभक्ति है। उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की ओर से वंदे मातरम को रोकने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "यह वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ है। 15 अगस्त, 2026 को लाल किले से छह श्लोकों वाला संपूर्ण वंदे मातरम गाया गया। लेकिन 15 अगस्त को कांग्रेस कार्यालय में एक अशोभनीय घटना घटी।"
कांग्रेस पर लगाया वंदे मातरम के अपमान का आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की उपस्थिति में, जब तिरंगा फहराया जा रहा था, सोनिया गांधी ने दो श्लोकों के बाद वंदे मातरम रोकने का इशारा किया। कांग्रेस इस मामले में डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रही थी। 19 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में एक प्रस्ताव आया कि हम वंदे मातरम के केवल दो श्लोक गाएंगे। कांग्रेस वंदे मातरम का विभाजन करना चाहती है। हम सभी जानते हैं कि 1937 में यह निर्णय क्यों लिया गया था।"
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भाजपा सांसद ने आगे कहा, ''1937 में केवल दो छंद गाने का यह फैसला क्यों लिया गया, हम सब जानते हैं। वंदे मातरम के 100 साल पूरे होने पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार में देश में आपातकाल लगा हुआ था। 150 वर्ष पूरे होने पर सदन में चर्चा होती है। आजादी से पहले ब्रिटिश सरकार वंदे मातरम को रोकती थी। आज कांग्रेस वही काम कर रही है।''
भाजपा का दावा- नेहरू के फैसले ने बोया विभाजन का बीज
उन्होंने कहा, ''1923 में आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम का संपूर्ण गायन होना था। मगर कांग्रेस के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अली ने वॉकआउट किया। इसके बाद 1937 में पहली बार जवाहरलाल नेहरू के कहने पर वंदे मातरम को विभाजित कर एक हिस्सा ही गाने का प्रस्ताव लाया गया। 1938 में नेहरू ने मोहम्मद अली जिन्ना को लिखी चिट्ठी में 14 मांगों के सामने घुटने टेक दिए। उन्होंने वंदे मातरम के संपूर्ण पठन को रोक दिया।''
संबित पात्रा ने कहा, ''पंडित नेहरू की ओर से 1937 में बोया गया, यही तुष्टिकरण का बीज आगे चलकर देश के विभाजन की वजह बना। कांग्रेस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी का जो व्यवहार 15 अगस्त को रहा। इसके बाद जो कांग्रेस कार्य समिति में 1937 के प्रस्ताव को फिर से पारित किया गया। इस पर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पुरजोर तरीके से कहा है कि कांग्रेस यह जो विभाजन का बीज बोने की कोशिश कर रही है, हम ऐसा नहीं होने देंगे।''
वंदे मातरम पर महात्मा गांधी के पत्र का किया जिक्र
पात्रा ने कहा, ''महात्मा गांधी ने स्वयं वंदे मातरम के बारे में लिखा था- "इसका स्रोत क्या था और इसकी रचना कब और कैसे हुई, यह अलग बात है; लेकिन बंगाल के विभाजन के दिनों में यह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एक अत्यंत शक्तिशाली युद्धघोष बन गया था। यह साम्राज्यवाद विरोधी नारा था। जब मैं छोटा था और न आनंदमठ के बारे में जानता था, न उसके अमर रचयिता बंकिम के बारे में, तब भी वंदे मातरम ने मुझे अपने प्रभाव में ले लिया था।''
उन्होंने कहा, ''महात्मा गांधी ने लिखा था- जब मैंने इसे पहली बार सुना और गाया, तो यह मुझे मंत्रमुग्ध कर गया। मैंने इसके साथ शुद्धतम राष्ट्रीय भावना को जोड़ा। मुझे कभी यह विचार नहीं आया कि यह हिंदुओं का गीत है या केवल हिंदुओं के लिए है। दुर्भाग्य से, आज हम बुरे दौर में आ गए हैं।"
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संबित पात्रा ने कहा कि वंदे मातरम के बीज मंत्र के मूल में देश और देशभक्ति है। उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की ओर से वंदे मातरम को रोकने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "यह वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ है। 15 अगस्त, 2026 को लाल किले से छह श्लोकों वाला संपूर्ण वंदे मातरम गाया गया। लेकिन 15 अगस्त को कांग्रेस कार्यालय में एक अशोभनीय घटना घटी।"
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कांग्रेस पर लगाया वंदे मातरम के अपमान का आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की उपस्थिति में, जब तिरंगा फहराया जा रहा था, सोनिया गांधी ने दो श्लोकों के बाद वंदे मातरम रोकने का इशारा किया। कांग्रेस इस मामले में डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रही थी। 19 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में एक प्रस्ताव आया कि हम वंदे मातरम के केवल दो श्लोक गाएंगे। कांग्रेस वंदे मातरम का विभाजन करना चाहती है। हम सभी जानते हैं कि 1937 में यह निर्णय क्यों लिया गया था।"
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भाजपा सांसद ने आगे कहा, ''1937 में केवल दो छंद गाने का यह फैसला क्यों लिया गया, हम सब जानते हैं। वंदे मातरम के 100 साल पूरे होने पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार में देश में आपातकाल लगा हुआ था। 150 वर्ष पूरे होने पर सदन में चर्चा होती है। आजादी से पहले ब्रिटिश सरकार वंदे मातरम को रोकती थी। आज कांग्रेस वही काम कर रही है।''
भाजपा का दावा- नेहरू के फैसले ने बोया विभाजन का बीज
उन्होंने कहा, ''1923 में आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम का संपूर्ण गायन होना था। मगर कांग्रेस के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अली ने वॉकआउट किया। इसके बाद 1937 में पहली बार जवाहरलाल नेहरू के कहने पर वंदे मातरम को विभाजित कर एक हिस्सा ही गाने का प्रस्ताव लाया गया। 1938 में नेहरू ने मोहम्मद अली जिन्ना को लिखी चिट्ठी में 14 मांगों के सामने घुटने टेक दिए। उन्होंने वंदे मातरम के संपूर्ण पठन को रोक दिया।''
संबित पात्रा ने कहा, ''पंडित नेहरू की ओर से 1937 में बोया गया, यही तुष्टिकरण का बीज आगे चलकर देश के विभाजन की वजह बना। कांग्रेस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी का जो व्यवहार 15 अगस्त को रहा। इसके बाद जो कांग्रेस कार्य समिति में 1937 के प्रस्ताव को फिर से पारित किया गया। इस पर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पुरजोर तरीके से कहा है कि कांग्रेस यह जो विभाजन का बीज बोने की कोशिश कर रही है, हम ऐसा नहीं होने देंगे।''
वंदे मातरम पर महात्मा गांधी के पत्र का किया जिक्र
पात्रा ने कहा, ''महात्मा गांधी ने स्वयं वंदे मातरम के बारे में लिखा था- "इसका स्रोत क्या था और इसकी रचना कब और कैसे हुई, यह अलग बात है; लेकिन बंगाल के विभाजन के दिनों में यह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एक अत्यंत शक्तिशाली युद्धघोष बन गया था। यह साम्राज्यवाद विरोधी नारा था। जब मैं छोटा था और न आनंदमठ के बारे में जानता था, न उसके अमर रचयिता बंकिम के बारे में, तब भी वंदे मातरम ने मुझे अपने प्रभाव में ले लिया था।''
उन्होंने कहा, ''महात्मा गांधी ने लिखा था- जब मैंने इसे पहली बार सुना और गाया, तो यह मुझे मंत्रमुग्ध कर गया। मैंने इसके साथ शुद्धतम राष्ट्रीय भावना को जोड़ा। मुझे कभी यह विचार नहीं आया कि यह हिंदुओं का गीत है या केवल हिंदुओं के लिए है। दुर्भाग्य से, आज हम बुरे दौर में आ गए हैं।"