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MP News: आजीविका मिशन के अफसरों पर एफआईआर के 2 साल बाद भी चालान नहीं, EOW की कार्रवाई पर उठे सवाल

Sat, 22 Aug 2026 08:06 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sat, 22 Aug 2026 08:06 AM IST
सार
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मध्य प्रदेश आजीविका मिशन में कथित भ्रष्टाचार के मामले में FIR के करीब दो साल बाद भी चालान पेश नहीं होने पर ईओडब्ल्यू  की कार्रवाई सवालों के घेरे में है।  

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MP News: No charge sheet filed against Livelihood Mission officials even two years after FIR; questions raised
ललित मोहन बेलवाल और सुषमा रानी शुक्ला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए हैं। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के करीब दो साल बाद भी मामले में चालान पेश नहीं किया गया है।  सोशल एक्टिविस्ट भूपेंद्र प्रजापति ने शुक्रवार को ईओडब्ल्यू के डीजी को शिकायत पत्र सौंपा और आरोप लगाया कि विभागीय जांच में चार अधिकारियों-कर्मचारियों को दोषी माना गया था। इनमें आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलवाल, अतिरिक्त सीईओ विकास अवस्थी, राज्य परियोजना प्रबंधक सुषमा रानी शुक्ला और कर्मचारी संतोष कुरुप का नाम शामिल है। आरोप है कि एफआईआर में संतोष कुरुप को नामजद नहीं किया गया, जबकि विभागीय जांच में उनका नाम दोषियों में शामिल था। प्रजापति ने यह भी आरोप लगाया कि एफआईआर के बाद सुषमा रानी शुक्ला को विभाग से हटा दिया गया, जबकि संतोष कुरुप अब भी विभाग में कार्यरत हैं।
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कई जिलों में करोड़ों के कथित भ्रष्टाचार के आरोप
प्रजापति ने आरोप लगाया है कि आजीविका मिशन से जुड़े मामलों में गुना, दतिया, सागर, रायसेन और दमोह समेत कई जिलों से करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही है। उनका आरोप है कि दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर समय पर कार्रवाई नहीं होने से भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। प्रजापति ने यह भी कहा कि कथित अनियमितताओं का असर ग्रामीण महिलाओं के रोजगार पर पड़ा है। उनके अनुसार पोषण आहार संयंत्र, स्कूलों में गणवेश और आंगनवाड़ी में गुड़-चिक्की सप्लाई जैसे काम बंद होने से बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं की आजीविका प्रभावित हुई है।
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