हर महीने सैलरी आने के बाद कुछ दिनों तक लगता है कि इस बार तो पैसे आराम से चल जाएंगे। लेकिन जैसे-जैसे महीने के दिन बीतते हैं, खर्च बढ़ता जाता है और आखिर में अकाउंट बैलेंस देखकर अगली सैलरी का इंतजार शुरू हो जाता है। अगर आपके साथ भी अक्सर ऐसा होता है तो सैलरी को एक साथ खर्च करने के बजाय शुरुआत में ही चार हिस्सों में बांटना मददगार हो सकता है। इस तरीके से जरूरी खर्च के साथ बचत, निवेश और अपनी पसंद की चीजों के लिए भी पैसा तय किया जा सकता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति की इन-हैंड सैलरी 50 हजार रुपये है। इसे इस तरह बांटा जा सकता है।
Money Management: सैलरी मिलते ही कर लें ये एक काम, महीने के आखिरी दिनों में नहीं मांगनी पड़ेगी किसी से उधारी
Money Management: सैलरी आते ही उसे 50%, 20%, 20% और 10% के चार हिस्सों में बांटने से जरूरी खर्च, बचत, मनोरंजन और इमरजेंसी जरूरतों के लिए पैसा पहले से तय किया जा सकता है।
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25 हजार रुपये जरूरी खर्चों के लिए
सैलरी का करीब 50 फीसदी यानी 25 हजार रुपये उन खर्चों के लिए रखें, जिन्हें टाला नहीं जा सकता। इसमें घर का किराया या होम लोन की EMI, बिजली-पानी का बिल, राशन, आने-जाने का खर्च, मोबाइल-इंटरनेट और दूसरे जरूरी खर्च शामिल हो सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अलग होती है। ऐसे में किराया या EMI ज्यादा होने पर इस हिस्से को बढ़ाया भी जा सकता है।
10 हजार रुपये पहले ही बचाएं
अगले 20 फीसदी यानी 10 हजार रुपये को बचत और निवेश के लिए अलग कर दें। यह रकम SIP, RD, FD या किसी दूसरे खर्चों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। यहां सबसे जरूरी बात यह है कि महीने के अंत में बचने वाले पैसे का इंतजार न करें। सैलरी आते ही 10 हजार रुपये अलग खाते में ट्रांसफर करने से बचत की आदत मजबूत हो सकती है।
10 हजार रुपये खुद पर खर्च करें
बजट बनाने का मतलब यह नहीं कि हर पसंद की चीज पर रोक लगा दी जाए। इसलिए 20 फीसदी यानी 10 हजार रुपये अपने व्यक्तिगत और मनोरंजन से जुड़े खर्चों के लिए रखे जा सकते हैं। इससे शॉपिंग, बाहर खाना, मूवी, घूमना या ऑनलाइन ऑर्डर जैसे खर्च बजट के अंदर रहेंगे।
5 हजार रुपये इमरजेंसी के लिए
बाकी 10 फीसदी यानी 5 हजार रुपये अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग रखें। डॉक्टर की फीस, दवा, बाइक की मरम्मत, घर का जरूरी सामान या अचानक होने वाला यात्रा खर्च इसमें शामिल हो सकता है। अगर किसी महीने यह रकम इस्तेमाल नहीं होती है तो इसे आगे के लिए बचाया जा सकता है। धीरे-धीरे यही पैसा इमरजेंसी फंड का आधार बन सकता है।
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