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Jaipur News: बाघों के प्राकृतिक आवास को मिली राहत, हाईकोर्ट ने NHAI विश्राम गृह और भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाई

Fri, 21 Aug 2026 08:38 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Fri, 21 Aug 2026 08:38 PM IST
सार
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विकास परियोजना के नाम पर टाइगर हैबिटेट में जमीन लेने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। अदालत के फैसले के बाद NHAI के प्रस्तावित विश्राम गृह का काम रुक गया और किसानों को भूमि अधिग्रहण से बड़ी राहत मिली है।

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Jaipur News: Tiger Habitat Gets Relief, High Court Stays NHAI Rest House Construction and Land Acquisition
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट ने बाघों के प्राकृतिक आवास क्षेत्र में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से प्रस्तावित विश्राम गृह के निर्माण पर रोक लगा दी है। अदालत ने परियोजना के लिए किसानों की भूमि के अधिग्रहण से जुड़े आदेश को भी रद्द कर दिया। कोर्ट ने वन्यजीव संरक्षण और किसानों के अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए हैं।
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मामले में पर्यावरणविदों और स्थानीय किसानों की ओर से NHAI की प्रस्तावित परियोजना और भूमि अधिग्रहण को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि जिस क्षेत्र में विश्राम गृह बनाया जाना प्रस्तावित है, वह बाघों की आवाजाही और प्राकृतिक आवास के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित विभागों से जवाब तलब किया। उपलब्ध अभिलेखों और मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने का आदेश दिया।
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अदालत ने विश्राम गृह के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि के अधिग्रहण से जुड़े प्रशासनिक आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को प्रभावित भूमि किसानों को वापस सौंपने के निर्देश दिए गए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विकास परियोजनाओं के नाम पर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और पारिस्थितिक संतुलन से समझौता नहीं किया जा सकता। कृषि भूमि का अधिग्रहण भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और जनहित के स्थापित मानकों के अनुरूप ही होना चाहिए।
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बाघों के प्राकृतिक आवास जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को लेकर अदालत ने माना कि इसका वन्यजीवों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले पर्यावरणीय और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं का पालन जरूरी है। पीठ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में इस तरह की परियोजनाओं पर निर्णय लेने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का विस्तृत अध्ययन और आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां सुनिश्चित की जाएं।

हाईकोर्ट के इस फैसले से फिलहाल NHAI की विश्राम गृह परियोजना पर रोक लग गई है और भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई भी निरस्त हो गई है। फैसले को वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय किसानों के हितों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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