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राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय: यूनिवर्सिटी दो टूक, फेल छात्र नहीं किए जा सकते पास
Fri, 21 Aug 2026 10:15 AM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Fri, 21 Aug 2026 10:15 AM IST
डीएस कॉलेज के बीएएलएलबी और एलएलबी छात्रों का कहना है कि द्वितीय और तृतीय वर्ष के कई विद्यार्थी विशेष बैक परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुए हैं। वे शैक्षणिक सत्र को देखते हुए विशेष राहत की मांग कर रहे हैं।
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राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय अलीगढ़
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के विशेष बैक परीक्षा में अनुत्तीर्ण विधि छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच रस्साकसी जारी है। छात्र अगले सेमेस्टर में सीधे प्रवेश और ग्रेस मार्क्स देकर उत्तीर्ण करने की मांग कर रहे हैं जबकि विश्वविद्यालय ने नियमों का हवाला देते हुए इसे असंभव बताया है।
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बुधवार को धर्म समाज महाविद्यालय के बीएएलएलबी और एलएलबी के छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया था। आक्रोशित छात्रों ने मुख्य गेटों पर ताले जड़ दिए और अपनी मांगों को दोहराया। प्रदर्शन के दौरान 10 छात्रों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। डीएस कॉलेज के बीएएलएलबी और एलएलबी छात्रों का कहना है कि द्वितीय और तृतीय वर्ष के कई विद्यार्थी विशेष बैक परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुए हैं। वे शैक्षणिक सत्र को देखते हुए विशेष राहत की मांग कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय परिसर में स्थिति शांत रही।
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विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रबुद्ध सिंह ने कहा कि बैक परीक्षा देने का एक अवसर निर्धारित है। इसके बाद भी विद्यार्थी उत्तीर्ण नहीं होता है तो उसे एक्स छात्र के रूप में परीक्षा में शामिल होना होगा। विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के अनुसार अनुत्तीर्ण छात्र को सीधे अगले सेमेस्टर में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। कुलसचिव के अनुसार ग्रेस मार्क्स देने का प्रावधान केवल अंतिम वर्ष अथवा अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए है।
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परीक्षा नियंत्रक का उदाहरण
परीक्षा नियंत्रक धीरेंद्र सिंह ने एक विधि छात्रा का उदाहरण दिया। छात्रा ने सत्र 2022-23 में प्रवेश लिया और पहले सेमेस्टर में चार विषयों में अनुत्तीर्ण हो गई थी। उसने दूसरा सेमेस्टर नहीं दिया और बाद में सत्र 2023-24 में एक्स फॉर्म भरा। पहले सेमेस्टर में पास होने के बावजूद आवश्यक 48 फीसदी अंक नहीं मिले। परीक्षा नियंत्रक ने स्पष्ट किया कि अब उसके पास एक्स छात्र के रूप में परीक्षा देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।