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Ambedkar Nagar News: प्रधानाचार्य की पिटाई के मामले में शिक्षक दोषमुक्त
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अंबेडकरनगर। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट चिंताराम की अदालत ने शिक्षक गिरीश चंद्र पांडेय को दोषमुक्त किया। यह मामला प्रधानाचार्य से मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग से जुड़ा था। करीब छह साल पुराने इस मामले में साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने यह फैसला सुनाया।
अदालत ने अभियोजन के गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास पाया। घटना की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया। मामला कोतवाली अकबरपुर क्षेत्र के डॉ. जीके जेटली इंटर कॉलेज का था। प्रधानाचार्य विनय कुमार गौतम की तहरीर पर 14 फरवरी 2020 को गिरीश चंद्र पांडेय और राजेश कुमार गुप्ता पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। राजेश कुमार गुप्ता की विचारण के दौरान मृत्यु हो गई थी।
अभियोजन का आरोप था कि दोनों शिक्षक रसोइया उमा देवी और मिड-डे मील की फोटो खींच रहे थे। प्रधानाचार्य के रोकने पर उन्होंने मारपीट की और जातिसूचक शब्द कहे। अदालत ने पाया कि घटना के समय कक्षा छह से आठ तक की परीक्षाएं समाप्त थीं। बच्चे विद्यालय नहीं आ रहे थे, जिससे मिड-डे मील की कहानी संदिग्ध लगी। रसोइया उमा देवी ने भी जिरह में मारपीट और गाली-गलौज से इन्कार कर दिया। बचाव पक्ष ने दिखाया कि आरोपी शिक्षकों ने पहले प्रधानाचार्य पर 16 लाख रुपये के गबन के आरोप लगाए थे। मेडिकल रिपोर्ट से भी आरोपों को खास बल नहीं मिला।
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अदालत ने अभियोजन के गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास पाया। घटना की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया। मामला कोतवाली अकबरपुर क्षेत्र के डॉ. जीके जेटली इंटर कॉलेज का था। प्रधानाचार्य विनय कुमार गौतम की तहरीर पर 14 फरवरी 2020 को गिरीश चंद्र पांडेय और राजेश कुमार गुप्ता पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। राजेश कुमार गुप्ता की विचारण के दौरान मृत्यु हो गई थी।
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अभियोजन का आरोप था कि दोनों शिक्षक रसोइया उमा देवी और मिड-डे मील की फोटो खींच रहे थे। प्रधानाचार्य के रोकने पर उन्होंने मारपीट की और जातिसूचक शब्द कहे। अदालत ने पाया कि घटना के समय कक्षा छह से आठ तक की परीक्षाएं समाप्त थीं। बच्चे विद्यालय नहीं आ रहे थे, जिससे मिड-डे मील की कहानी संदिग्ध लगी। रसोइया उमा देवी ने भी जिरह में मारपीट और गाली-गलौज से इन्कार कर दिया। बचाव पक्ष ने दिखाया कि आरोपी शिक्षकों ने पहले प्रधानाचार्य पर 16 लाख रुपये के गबन के आरोप लगाए थे। मेडिकल रिपोर्ट से भी आरोपों को खास बल नहीं मिला।
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