औरैया दोहरा हत्याकांड: मंगलवार-शनिवार को पड़ी तारीखें, बुधवार को आया फैसला, मृतक का भाई बोला- सच की हुई है जीत
Auraiya Double Murder Case: दोहरे हत्याकांड में साढ़े छह साल की लंबी कानूनी लड़ाई और 900 से अधिक तारीखों के बाद आखिरकार न्याय मिल गया। दिलचस्प बात यह है कि अदालत में सुनवाई की अधिकांश तारीखें मंगलवार और शनिवार को पड़ीं, जबकि अंतिम फैसला बुधवार को आया।
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औरैया जिले में मोहल्ला नरानपुर स्थित पंचमुखी मंदिर परिसर में चचेरे भाई मंजुल चौबे और बहन सुधा की गोली मारकर हत्या के मामले में पिछले साढ़े छह वर्षों में अदालत में 900 से अधिक तारीखें पड़ीं। दिलचस्प बात यह है कि अदालत में सुनवाई की सभी तारीखें शनिवार और मंगलवार के दिन ही पड़ीं, जबकि मामले में अंतिम फैसला बुधवार को सुनाया गया।
मृतक के भाई संजय चौबे का कहना है कि निचले न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक अधिवक्ताओं ने न्याय की इस लड़ाई में उनका पूरा साथ दिया। यह कहते हुए वह भावुक हो गए। कहा कि रसूखदार के सामने सही मायनों में अगर किसी ने इस केस की सबसे मजबूत पैरवी की, तो वे स्वयं बजरंगबली हैं।
मानसिक और शारीरिक रूप से बिखरने नहीं दिया
क्योंकि यह पूरी वारदात उनके सामने घटित हुई थी। संजय ने बताया कि तारीख वाले दिन जालौन, कानपुर, इटावा से लोग आकर तारीख पर जाने के दौरान डराते थे। कोर्ट में शिकायत की, तो पुलिस सुरक्षा मिली। कहा कि हर मोड़ पर बजरंगबली की कृपा बनी रही, जिसने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से बिखरने नहीं दिया।
कार्रवाई को कमजोर करने के लिए फैलाई गई थी समझौते की अफवाह
दोहरे हत्याकांड में फैसले के अगले ही दिन जिले में यह चर्चा तेजी से फैलाई गई कि कमलेश पाठक ने वादी पक्ष को समझौते के बदले आठ करोड़ रुपये की पेशकश की थी। हालांकि, पीड़ित परिवार ने इसे साजिश बताया। मृतक के भाई संजय चौबे का कहना है कि आठ करोड़ रुपये में समझौते की अफवाह कोई नई नहीं है, बल्कि यह वारदात के बाद से ही लगातार उड़ाई जा रही थी।
दोनों पक्षों के बीच अंदरखाने समझौता हो जाएगा
उन्होंने बताया कि दोषियों और उनके समर्थकों की मंशा समाज में यह संदेश देने की थी कि दोनों पक्षों के बीच अंदरखाने समझौता हो जाएगा। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों तक भी योजनाबद्ध तरीके से पहुंचाया गया, ताकि अधिकारियों के मन में यह धारणा बन जाए कि मामला जल्द ही आपस में निपट जाएगा और वे कड़ी कार्रवाई में ढील दे दें।
अब ऑपरेशन कराएंगे संजय
15 मार्च 2020 को हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड में न्याय मिलने के बाद अब पीड़ित परिवार राहत की सांस ले रहा है। वारदात के दौरान जानलेवा हमले का शिकार हुए मृतक मंजुल चौबे के भाई संजय चौबे अब अपनी जांघ में फंसी गोली निकलवाने के लिए ऑपरेशन कराएंगे। घटना वाले दिन आरोपियों ने संजय पर रिवाल्वर से सीधा फायर किया था, जिससे एक गोली उनकी जांघ में जा धंसी थी।
शरीर से यह गोली बाहर नहीं निकलवाएंगे
संजय ने उस वक्त शुरुआती इलाज तो कराया, लेकिन गोली नहीं निकलवाई। उन्होंने प्रतिज्ञा ली थी कि जब तक दोहरे हत्याकांड के दोषियों को अदालत से सजा नहीं मिल जाती, तब तक वे शरीर से यह गोली बाहर नहीं निकलवाएंगे। अब संजय अगले 10 से 15 दिनों के भीतर ऑपरेशन कराकर इस गोली को बाहर निकलवाएंगे।
दीवार पर टंगी फोटो को देख आराध्या मां से पूछती ये कौन...
हत्याकांड के समय मृतक की मासूम बेटी आराध्या महज तीन माह की थी, जैसे-जैसे उसकी समझ बढ़ी तो वह कमरे की दीवार पर टंगी मंजुल की फोटो को देख अक्सर मां आरती से पूछती थी कि यह कौन हैं। बुधवार को पति व ननद के हत्यारों को उम्रकैद की सजा की जानकारी मंजुल की पत्नी को हुई तो वह फफक-फफक कर रो पड़ी। मां को रोता देख बेटी पूछती रही थी आप क्यों रो रही हो।
पीड़ित परिवार का एडीजी ने जाना हाल
औरैया। सदर कोतवाली पहुंची एडीजी अनुपम कुलशेष्ठ ने बृहस्पतिवार को दोहरे हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने विस्तार से घटना के बारे में पूछा और परिवार के हालचाल भी लिए। साथ ही उन्होंने पुलिस से परिवार की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर रखने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान उन्होंने घटना के समय के वीडियो भी देखें। इसके अलावा एडीजी डीजीसी अभिषेक मिश्रा, एडीजीसी चंद्र भूषण तिवारी पैरोकार अनूप कुमार, कोर्ट मोहर्रिर विनय सिंह को प्रभावी पैरवी व समन्वय स्थापित करते हुए अपराधियों को न्यायालय से कठोर दंड दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में प्रशस्ति पत्र दिया।
दोषियों को सजा मिलने के बाद वादी व भाई ने मंदिर में टेका मत्था
औरैया। एमपी-एमएलए कोर्ट ने कमलेश पाठक समेत 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा होने के बाद वादी आशीष चौबे व उनके चचेरे भाई संजय चौबे उसी पंचमुखी मंदिर पहुंचे, जहां इस वारदात को अंजाम दिया गया था। वहां दोनों ने बजरंगबली के सामने मत्था टेका और प्रसाद चढ़ाया। बृहस्पतिवार को मृतक की मां परिवार के साथ मंदिर पहुंची और भगवान के सामने हाथ जोड़कर धन्यवाद ज्ञापित किया।