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कानपुर: वायुसेना की ताकत को और बढ़ाएगा आईआईटी, सेना और संस्थान के अधिकारियों के बीच हुआ एमओयू साइन
Sun, 23 Aug 2026 08:59 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Sun, 23 Aug 2026 08:59 PM IST
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वायुसेना के अधिकारियों के साथ आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर
- फोटो : अमर उजाला
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आईआईटी कानपुर भारतीय वायुसेना की ताकत को और बढ़ाएगा। उसके लिए भविष्य में आने वाली चुनौतियों का तकनीकी आधारित समाधान निकालेगा। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स के माध्यम से होगा। संस्थान के विशेषज्ञ सुरक्षा, सर्विलांस, आपदा प्रबंधन और त्वरित कार्रवाई के लिए टूल्स विकसित करेंगे, जो कि पूरी तरह से स्वेदशी रहेंगे। इस कार्य के लिए नई दिल्ली स्थित वायु भवन में भारतीय वायुसेना और आईआईटी कानपुर के बीच करार हुआ है।
भारतीय सेना अब स्वदेशी तकनीक से स्वयं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। सेना के अधिकारी देश की अलग अलग आईआईटी से संपर्क कर रहे हैं। आईआईटी कानपुर में भी वर्तमान समय कॉमिकेज ड्रोन, साइबर सुरक्षा टूल समेत अत्याधुनिक सेंसर विकसित किए जा रहे हैं। वायु सेना ने स्वदेशी तकनीक से खुद की मजबूती के लिए आईआईटी कानपुर के साथ समझौता किया है। यह साझेदारी भारतीय वायुसेना की परिचालन विशेषज्ञता को अत्याधुनिक शोध क्षमता और उसके डीपटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ेगी।
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भारतीय सेना अब स्वदेशी तकनीक से स्वयं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। सेना के अधिकारी देश की अलग अलग आईआईटी से संपर्क कर रहे हैं। आईआईटी कानपुर में भी वर्तमान समय कॉमिकेज ड्रोन, साइबर सुरक्षा टूल समेत अत्याधुनिक सेंसर विकसित किए जा रहे हैं। वायु सेना ने स्वदेशी तकनीक से खुद की मजबूती के लिए आईआईटी कानपुर के साथ समझौता किया है। यह साझेदारी भारतीय वायुसेना की परिचालन विशेषज्ञता को अत्याधुनिक शोध क्षमता और उसके डीपटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ेगी।
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ड्रोन, यूएवी और सेंसर बनाए जाएंगे
आईआईटी कानपुर के अधिकारियों से वृहद चर्चा हुई, जिसके बाद हुए समझौते में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन एवं यूएवी, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, एडवांस्ड सेंसर, एयरोस्पेस और अन्य उभरती तकनीकों का सहयोग लेकर वायुसेना की चुनौतियों का समाधान किया जाएगा। संस्थान के एसआईआईसी के प्रोफेसर इन चार्ज प्रो. दीपू फिलिप ने बताया कि इस समझौते के तहत वायुसेना की जरूरतों की पहचान से लेकर प्रोटोटाइप बनाने, उसका परीक्षण करने और उपयोगी तकनीक को आगे बढ़ाने तक का काम किया जाएगा।
आईआईटी कानपुर के अधिकारियों से वृहद चर्चा हुई, जिसके बाद हुए समझौते में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन एवं यूएवी, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, एडवांस्ड सेंसर, एयरोस्पेस और अन्य उभरती तकनीकों का सहयोग लेकर वायुसेना की चुनौतियों का समाधान किया जाएगा। संस्थान के एसआईआईसी के प्रोफेसर इन चार्ज प्रो. दीपू फिलिप ने बताया कि इस समझौते के तहत वायुसेना की जरूरतों की पहचान से लेकर प्रोटोटाइप बनाने, उसका परीक्षण करने और उपयोगी तकनीक को आगे बढ़ाने तक का काम किया जाएगा।
सेना के साथ पहले से चल रहा काम
आईआईटी कानपुर पहले भी सशस्त्र बलों के साथ अनुसंधान और स्वदेशीकरण से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इस समझौते के तहत आईआईटी कानपुर के शोध के साथ डीपटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी जोड़ा जाएगा। जिससे शोध आधारित तकनीकों को व्यवसायिक उत्पादों में बदला जा सकेगा।
आईआईटी कानपुर पहले भी सशस्त्र बलों के साथ अनुसंधान और स्वदेशीकरण से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इस समझौते के तहत आईआईटी कानपुर के शोध के साथ डीपटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी जोड़ा जाएगा। जिससे शोध आधारित तकनीकों को व्यवसायिक उत्पादों में बदला जा सकेगा।