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Kushinagar News: 17 साल पुराने मुकदमे में सांसद विजय कुमार दुबे बरी, बोले- यह जनता की जीत
Thu, 20 Aug 2026 02:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 20 Aug 2026 02:53 AM IST
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कोर्ट से बाहर निकलते सांसद विजय कुमार दूबे। स्रोत -सोशल मीडिया
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कुशीनगर। सांसद विजय कुमार दुबे को 17 साल पुराने मुकदमे में बुधवार को बड़ी राहत मिली। एमपी-एमएलए कोर्ट के सीजेएम राजन कुमार गोंड ने सांसद को दोषमुक्त कर दिया। फैसला सुनाए जाने के बाद कोर्ट से बाहर निकले सांसद ने इसे जनता की जीत बताया और न्यायपालिका के प्रति आभार जताया।
मामला वर्ष 2009 का है। खड्डा चीनी मिल में गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर हिंदू युवा वाहिनी और भाजपा के संयुक्त तत्वावधान में धरना-प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन की अगुवाई तत्कालीन भाजपा नेता विजय कुमार दुबे कर रहे थे। आंदोलन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर दी थी। स्थानीय पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में गठित एमपी-एमएलए कोर्ट में चलती रही।
सांसद की ओर से अधिवक्ता अशोक सिंह ने पैरवी की। पिछली कई तारीखों पर लगातार सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को फैसले के लिए तिथि निर्धारित थी। सांसद करीब 3:30 बजे कोर्ट रूम पहुंचे। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। करीब एक घंटे बाद वह कोर्ट से बाहर निकले। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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बोले- न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था
कोर्ट से बाहर आने के बाद सांसद विजय कुमार दुबे ने मीडिया से कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। वह हमेशा जनहित के मुद्दों को लेकर संघर्ष करते रहे हैं, लेकिन कभी कानून का उल्लंघन नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार में उनके खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया था। अदालत के फैसले को उन्होंने न्याय की जीत और जनता की जीत बताया। सांसद के बरी होने की जानकारी मिलते ही उनके समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय की जीत बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की।
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मामला वर्ष 2009 का है। खड्डा चीनी मिल में गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर हिंदू युवा वाहिनी और भाजपा के संयुक्त तत्वावधान में धरना-प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन की अगुवाई तत्कालीन भाजपा नेता विजय कुमार दुबे कर रहे थे। आंदोलन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर दी थी। स्थानीय पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में गठित एमपी-एमएलए कोर्ट में चलती रही।
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सांसद की ओर से अधिवक्ता अशोक सिंह ने पैरवी की। पिछली कई तारीखों पर लगातार सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को फैसले के लिए तिथि निर्धारित थी। सांसद करीब 3:30 बजे कोर्ट रूम पहुंचे। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। करीब एक घंटे बाद वह कोर्ट से बाहर निकले। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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बोले- न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था
कोर्ट से बाहर आने के बाद सांसद विजय कुमार दुबे ने मीडिया से कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। वह हमेशा जनहित के मुद्दों को लेकर संघर्ष करते रहे हैं, लेकिन कभी कानून का उल्लंघन नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार में उनके खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया था। अदालत के फैसले को उन्होंने न्याय की जीत और जनता की जीत बताया। सांसद के बरी होने की जानकारी मिलते ही उनके समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय की जीत बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की।