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Siddharthnagar News: मरम्मत योग्य भी नहीं हैं 12 ब्लॉक के 144 फ्लैट
Sat, 22 Aug 2026 02:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 22 Aug 2026 02:16 AM IST
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दो फ्लैट के छत ढहने के बाद शहर में स्थित कांशीराम आवास भवन की हो रही जांच
दीवारों में दरार, झड़ता प्लास्टर और टपकती छत के बीच 12 ब्लॉक मरम्मत योग्य नहीं
सिद्धार्थनगर। 18 जुलाई को शहर के कांशीराम आवास के ब्लॉक संख्या 40 और 41 के दो फ्लैट के छत ढहने के बाद भवन की गुणवत्ता की जांच करीब पूरी हो चुकी है। सूत्र बताते हैं कि 38 से 50 ब्लॉक की स्थिति सबसे खराब है। लगातार जलभराव से इन 12 ब्लॉकों के 144 फ्लैट की नींव कमजोर और प्लास्टर झड़ने के साथ छत और दीवारें दरक गईं हैं। भवन निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कांशीराम आवास के यह हिस्सा अब मरम्मत योग्य भी नहीं बचा है और इसे ध्वस्त कराना ही एकमात्र विकल्प है।
कांशीराम आवास के दो फ्लैट के छत ढहने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय टीम कांशीराम आवास भवन की गुणवत्ता और रहने योग्य है या नहीं, इसकी जांच कर रही है। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता कमल किशोर की अध्यक्षता में गठित टीम में बतौर सदस्य नगर पालिका ईओ अजय कुमार सिंह, परियोजना निदेशक डूडा नीरज अग्रवाल और सहायक अभियंता आवास और विकास परिषद सतीश कुमार भी शामिल है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की ओर से वर्ष 2011 में शहरी गरीब आवास योजना के तहत लगभग 50 करोड़ की लागत से नगर पालिका में एक हजार आवासों का निर्माण कराया गया था। शहर की ऑफिसर्स कॉलोनी में तीन फ्लाेर में निर्मित कांशीराम आवास में 84 ब्लॉक है, जिसमें प्रत्येक ब्लॉक में 12 फ्लैट है। प्रत्येक फ्लैट में दो कमरे के साथ किचन और शौचालय का निर्माण कराया गया है। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने नौ अक्टूबर 2008 को इसका शिलान्यास किया था। वर्ष 2011 में निर्माण पूरा होने के बाद आवासों का आवंटन किया गया था। निर्माण के मात्र 15 वर्ष बाद ही इन भवनों की हालत जर्जर हो चुकी है, जिससे निर्माण के दौरान कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं अब इन आवासों में रहने वालों पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि छत ढहने के हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ था लेकिन इससे आवास के 84 ब्लॉक के एक हजार फ्लैट में रहने वाले सहमे हुए हैं।
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बरसात में डर के बीच गुजर रहीं रातें
कांशीराम आवास के ब्लॉक संख्या 38 से 50 के बीच स्थित फ्लैट के अक्सर छत और दीवार का प्लास्टर गिरने से नुकसान के साथ लोग चोटिल भी हो रहे हैं। इनमें रहने वाले मुनव्वर अली, असगर और आमना खातून कहती है कि वैसे तो बिना बारिश के ही दीवार और छत के प्लास्टर गिरते रहते हैं लेकिन जब से दो फ्लैट के छत ढहे हैं, तबसे बारिश के दौरान पूरी रात अनहोनी की आशंका से नींद नहीं आती है। बच्चों और परिवार की सुरक्षा की बहुत चिंता सताती रहती है। जैसे-तैसे रात काट रहे हैं। उन्होंने नगर पालिका और प्रशासन से इस समस्या का जल्द निदान करने की उम्मीद जताई है।
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दरवाजे तक जलभराव, झेल रहे सांसत
कांशीराम आवास के इन फ्लैटों के बाहर पसरे गंदे पानी के बीच से गुजरना यहां के लोगों की दिनचर्या में शामिल हो चुका है। कॉलोनी के रहने वाले मोहम्मद हनीफ, राजदीप सिंह व तूफेल अहमद कहते हैं कि सड़क से दरवाजे तक पसरे गंदे पानी और दुर्गंध के बीच रहना उनकी मजबूरी है। जलनिकासी नहीं होने से थोड़ी सी बारिश के बाद ही यहांं जलभराव की स्थिति हो जाती है जो कई दिन बनी रहती है। कांशीराम आवास से हाईवे तक नया नाला बनाया गया है लेकिन नाले की हाईवे के नाले की सतह ऊपर होने से कांशीराम आवास का पानी उसमें नहीं गिर रहा है, जिससे जलनिकासी प्रभावित हो रही है।
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उच्चस्तरीय जांच के बाद ही हो सकेगा अंतिम निर्णय
चार सदस्यीय टीम कांशीराम आवास की गुणवत्ता और रहने योग्य है या नहीं की जांच करते हुए प्राथमिक जांच कर रही है। लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से बने इस भवन के संबंध में किसी भी तरह के निर्णय के लिए उच्चस्तरीय जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लेने की बात कर रहे हैं। प्राथमिक जांच में असुरक्षित पाए जाने के बावजूद भवन का उच्चस्तरीय टेक्निकल जांच और निर्माण सामग्री का लैब टेस्ट भी कराया जाएगा, जिसमें असुरक्षित पाए जाने पर ही भवन खाली कराने या ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया संबंधी निर्णय हो सकेगा।
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दरारों और गुणवत्ता की पता चलेगी हकीकत
जांच टीम ने भवन के बाहरी और आंतरिक हिस्सों का निरीक्षण करके दरारें, झुकाव, दीवारों की मोटाई और सीलन या जंग लगने के संकेतों की जांच की है। वास्तविक क्षमता और मजबूती जांच के लिए लैब टेस्ट किया जाना है। इसमें कंक्रीट और स्टील की मजबूती जांच के तहत कंक्रीट के अंदर की दरारों, छिद्रों व गुणवत्ता का पता चल सकेगा। इसके साथ ही भवन की नींव, कॉलम, बीम और छत का तकनीकी और भौतिक मूल्यांकन कर भार वहन क्षमता का आंकलन करते हुए यह निष्कर्ष निकाला जा सकेगा कि भवन सुरक्षित है या नहीं।
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दो फ्लैट के छत गिरने की घटना के बाद इस जर्जर हो चुके आवास में हर समय हादसे का डर बना रहता है। यहां रहना भी हम लोगों की मजबूरी है।
श्याम कुमारी, कांशीराम आवास कॉलोनी
जांच के साथ ही इस समस्या का निदान किया जाए ताकि हम अपने परिवार के साथ यहां सुरक्षित रह सके। किसी तरह की हादसे की आशंका न रहे।
शमीम अहमद, कांशीराम आवास कॉलोनी
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जिलाधिकारी के निर्देश पर टीम कांशीराम आवास भवन के गुणवत्ता व सुरक्षित होने की जांच कर रही है। जल्द ही इसकी रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। इसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
कमल किशोर, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी व अध्यक्ष जांच टीम
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दीवारों में दरार, झड़ता प्लास्टर और टपकती छत के बीच 12 ब्लॉक मरम्मत योग्य नहीं
सिद्धार्थनगर। 18 जुलाई को शहर के कांशीराम आवास के ब्लॉक संख्या 40 और 41 के दो फ्लैट के छत ढहने के बाद भवन की गुणवत्ता की जांच करीब पूरी हो चुकी है। सूत्र बताते हैं कि 38 से 50 ब्लॉक की स्थिति सबसे खराब है। लगातार जलभराव से इन 12 ब्लॉकों के 144 फ्लैट की नींव कमजोर और प्लास्टर झड़ने के साथ छत और दीवारें दरक गईं हैं। भवन निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कांशीराम आवास के यह हिस्सा अब मरम्मत योग्य भी नहीं बचा है और इसे ध्वस्त कराना ही एकमात्र विकल्प है।
कांशीराम आवास के दो फ्लैट के छत ढहने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय टीम कांशीराम आवास भवन की गुणवत्ता और रहने योग्य है या नहीं, इसकी जांच कर रही है। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता कमल किशोर की अध्यक्षता में गठित टीम में बतौर सदस्य नगर पालिका ईओ अजय कुमार सिंह, परियोजना निदेशक डूडा नीरज अग्रवाल और सहायक अभियंता आवास और विकास परिषद सतीश कुमार भी शामिल है।
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बता दें कि उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की ओर से वर्ष 2011 में शहरी गरीब आवास योजना के तहत लगभग 50 करोड़ की लागत से नगर पालिका में एक हजार आवासों का निर्माण कराया गया था। शहर की ऑफिसर्स कॉलोनी में तीन फ्लाेर में निर्मित कांशीराम आवास में 84 ब्लॉक है, जिसमें प्रत्येक ब्लॉक में 12 फ्लैट है। प्रत्येक फ्लैट में दो कमरे के साथ किचन और शौचालय का निर्माण कराया गया है। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने नौ अक्टूबर 2008 को इसका शिलान्यास किया था। वर्ष 2011 में निर्माण पूरा होने के बाद आवासों का आवंटन किया गया था। निर्माण के मात्र 15 वर्ष बाद ही इन भवनों की हालत जर्जर हो चुकी है, जिससे निर्माण के दौरान कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं अब इन आवासों में रहने वालों पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि छत ढहने के हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ था लेकिन इससे आवास के 84 ब्लॉक के एक हजार फ्लैट में रहने वाले सहमे हुए हैं।
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कांशीराम आवास के ब्लॉक संख्या 38 से 50 के बीच स्थित फ्लैट के अक्सर छत और दीवार का प्लास्टर गिरने से नुकसान के साथ लोग चोटिल भी हो रहे हैं। इनमें रहने वाले मुनव्वर अली, असगर और आमना खातून कहती है कि वैसे तो बिना बारिश के ही दीवार और छत के प्लास्टर गिरते रहते हैं लेकिन जब से दो फ्लैट के छत ढहे हैं, तबसे बारिश के दौरान पूरी रात अनहोनी की आशंका से नींद नहीं आती है। बच्चों और परिवार की सुरक्षा की बहुत चिंता सताती रहती है। जैसे-तैसे रात काट रहे हैं। उन्होंने नगर पालिका और प्रशासन से इस समस्या का जल्द निदान करने की उम्मीद जताई है।
दरवाजे तक जलभराव, झेल रहे सांसत
कांशीराम आवास के इन फ्लैटों के बाहर पसरे गंदे पानी के बीच से गुजरना यहां के लोगों की दिनचर्या में शामिल हो चुका है। कॉलोनी के रहने वाले मोहम्मद हनीफ, राजदीप सिंह व तूफेल अहमद कहते हैं कि सड़क से दरवाजे तक पसरे गंदे पानी और दुर्गंध के बीच रहना उनकी मजबूरी है। जलनिकासी नहीं होने से थोड़ी सी बारिश के बाद ही यहांं जलभराव की स्थिति हो जाती है जो कई दिन बनी रहती है। कांशीराम आवास से हाईवे तक नया नाला बनाया गया है लेकिन नाले की हाईवे के नाले की सतह ऊपर होने से कांशीराम आवास का पानी उसमें नहीं गिर रहा है, जिससे जलनिकासी प्रभावित हो रही है।
उच्चस्तरीय जांच के बाद ही हो सकेगा अंतिम निर्णय
चार सदस्यीय टीम कांशीराम आवास की गुणवत्ता और रहने योग्य है या नहीं की जांच करते हुए प्राथमिक जांच कर रही है। लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से बने इस भवन के संबंध में किसी भी तरह के निर्णय के लिए उच्चस्तरीय जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लेने की बात कर रहे हैं। प्राथमिक जांच में असुरक्षित पाए जाने के बावजूद भवन का उच्चस्तरीय टेक्निकल जांच और निर्माण सामग्री का लैब टेस्ट भी कराया जाएगा, जिसमें असुरक्षित पाए जाने पर ही भवन खाली कराने या ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया संबंधी निर्णय हो सकेगा।
दरारों और गुणवत्ता की पता चलेगी हकीकत
जांच टीम ने भवन के बाहरी और आंतरिक हिस्सों का निरीक्षण करके दरारें, झुकाव, दीवारों की मोटाई और सीलन या जंग लगने के संकेतों की जांच की है। वास्तविक क्षमता और मजबूती जांच के लिए लैब टेस्ट किया जाना है। इसमें कंक्रीट और स्टील की मजबूती जांच के तहत कंक्रीट के अंदर की दरारों, छिद्रों व गुणवत्ता का पता चल सकेगा। इसके साथ ही भवन की नींव, कॉलम, बीम और छत का तकनीकी और भौतिक मूल्यांकन कर भार वहन क्षमता का आंकलन करते हुए यह निष्कर्ष निकाला जा सकेगा कि भवन सुरक्षित है या नहीं।
दो फ्लैट के छत गिरने की घटना के बाद इस जर्जर हो चुके आवास में हर समय हादसे का डर बना रहता है। यहां रहना भी हम लोगों की मजबूरी है।
श्याम कुमारी, कांशीराम आवास कॉलोनी
जांच के साथ ही इस समस्या का निदान किया जाए ताकि हम अपने परिवार के साथ यहां सुरक्षित रह सके। किसी तरह की हादसे की आशंका न रहे।
शमीम अहमद, कांशीराम आवास कॉलोनी
जिलाधिकारी के निर्देश पर टीम कांशीराम आवास भवन के गुणवत्ता व सुरक्षित होने की जांच कर रही है। जल्द ही इसकी रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। इसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
कमल किशोर, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी व अध्यक्ष जांच टीम