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Striking sanitation workers protest in Fatehabad; they held an angry march through the city and submitted a memorandum to MLA Daulatpuria.
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फतेहाबाद में हड़ताली सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन, शहर में रोष मार्च निकाल विधायक दौलतपुरिया को सौंपा ज्ञापन
नगरपरिषद फतेहाबाद के सफाई कर्मचारियों का अपनी मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन लगातार जारी है। गुरुवार को कर्मचारियों की हड़ताल 15वें दिन में प्रवेश कर गई, जिससे नगरपरिषद कार्यालय में कामकाज पूरी तरह ठप्प रहा और कर्मचारी परिसर में धरना देकर बैठे रहे। आज की हड़ताल की अध्यक्षता नगरपालिका कर्मचारी संघ के इकाई प्रधान नरेश राणा ने की, जबकि मंच का संचालन सचिव ओम प्रकाश लोट द्वारा किया गया। कर्मचारियों के आंदोलन को अब जनसमर्थन भी मिलने लगा है। आज धरना स्थल पर सामाजिक संस्था जिंदगी के संस्थापक हरदीप सिंह अपनी पूरी टीम के साथ पहुंचे। उनके साथ खेत मजदूर यूनियन के राज्य नेता रामकुमार बबलपुरिया, नागरिक अधिकार मंच से राजीव सेतिया, पूर्व पार्षद ललित गोयल, पार्षद मोहन लाल नारंग, वीरेंद्र सारसर और अमित घोगलिया ने भी पहुंचकर कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया और सरकार से समाधान की मांग की। धरने के दौरान आक्रोशित कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी भड़ास निकाली। इसके बाद कर्मचारी एकजुट होकर शहर के मुख्य बाजारों से प्रदर्शन करते हुए रोष मार्च के रूप में अनाज मंडी पहुंचे। वहां उन्होंने कांग्रेस विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया के कार्यालय में जाकर एक मांग पत्र सौंपा। कर्मचारियों ने विधायक से मांग की कि वे विधानसभा में और सरकार के समक्ष उनकी मांगों को प्राथमिकता से उठाएं तथा जल्द से जल्द समाधान करवाएं।
आंदोलनरत कर्मचारियों को संबोधित करते हुए संघ के राज्य वरिष्ठ उप प्रधान रमेश तुषामड ने सरकार की ढुलमुल नीति पर करारा प्रहार किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि हड़ताल शब्द सुनते ही काम बंद होने और जनता की परेशानी का विचार आता है। लेकिन कोई भी मजदूर या कर्मचारी अपने बच्चों की रोजी-रोटी और घर का चूल्हा छोडक़र सडक़ पर बैठना नहीं चाहता। हड़ताल शौक नहीं, बल्कि कर्मचारियों की भारी मजबूरी है। जब बातचीत से समाधान न निकले और समझौतों को लागू न किया जाए, तब यह अंतिम हथियार अपनाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी समाज के सच्चे प्रहरी हैं, जो दूसरों की गंदगी उठाकर शहरों को स्वच्छ रखते हैं और सीवर में जान जोखिम में डालते हैं। आज वे केवल वेतन नहीं, बल्कि कच्ची नौकरी व ठेका प्रथा से मुक्ति, पक्का रोजगार, समान काम के लिए समान वेतन और सम्मानजनक जीवन मांग रहे हैं। तुषामड़ ने कहा कि हड़ताल के कारण आम जनता की परेशानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन कर्मचारियों की पीड़ा को भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। जनता और सफाई कर्मचारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जनता को स्वच्छ शहर चाहिए और सफाई कर्मचारी को सम्मानजनक जीवन। उन्होंने सरकार से अपील की कि जनता और कर्मचारी दोनों की पीड़ा को समझते हुए तुरंत वार्ता कर समझौतों को धरातल पर लागू किया जाए।
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